सर्व मनोकामनाओं की पूर्ति हेतु रविवार का व्रत श्रेष्ठ है / इस व्रत की विधि इस प्रकार है / प्रातः काल स्नान आदि से निवृत्त हो स्वच्छ वस्त्र धारण करे। शान्तचित्त होकर परमात्मा का स्मरण करे / भोजन तथा फलाहार सूर्य के प्रकाश रहते ही कर लेना उचित है। यदि निराहार रहने पर सूर्य छिप जाए तो दूसरे दिन सूर्य उदय होने पर अये देने के बाद ही भोजन करे। व्रत के दिन नमकीन तेलयुक्त भोजन कदापि ना करे।इस व्रत को करने से मान-सम्मान बढ़ता है तथा शत्रुओं का क्षय होता है आँख की पीड़ा के अतिरिक्त अन्य सब पीड़ाएँ दूर होती हैं।